जमुई/चकाई,प्रखंड के चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र के नावाडीह सिल्फरी पंचायत अंतर्गत अखाने गांव में गुरुवार की रात 2:30 बजे के करीब एक घर में घुसे पेंगोलिन को स्थानीय लोगों ने मार डाला.ग्रामीणों ने बताया कि रात्रि 2:30 बजे के करीब जब एक महिला उठी तो उसे आभास हुआ कि गांव की गली से कोई गुजर रहा है. उसने टॉर्च जलाया तो देखा कि एक अजीब तरह का जंतु गली से गुजरते हुए घर की और घुस रहा है. इसके बाद महिला ने हो-हल्ला मचाना प्रारंभ किया.जिसके बाद बड़ी संख्या में गांव के लोग जुटे इस बीच वह जीव जंतु एक घर में घुस गया और देखते ही देखते 5 मिनट के अंदर दीवाल में छेद कर डाला.
इसी बीच कुछ युवाओं ने गूगल के सहारे उस जंतु की पहचान दुर्लभ प्रजाति के पेंगोलिन के रूप में किया. लेकिन तभी ग्रामीणों ने भय के कारण लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से पीट-पीटकर पैंगोलिन को मार डाला. इधर जब सुबह हुई तो इस दुर्लभ प्रजाति के जीव को देखने के लिए आसपास के गांव की भीड़ सैकड़ों की संख्या में उमड़ पड़ी.लोग इस जीव को देखने के लिए दूर-दूर से आने लगे.इसी दौरान ग्रामीणों ने मृत पैंगोलिन को नदी किनारे फेंक दिया . वही वन विभाग को इसकी सूचना मिली सूचना पर रेंजर राजेश कुमार, आरक्षी सुनील कुमार,विनोद चौधरी वन विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचे और उस जगह का मुआयना किया जहाँ रात में पेंगोलिन ने दीवाल में छेद कर दिया था.वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों से जानकारी भी प्राप्त की और मोबाइल पर लिए गए फोटो के आधार पर इसकी पुष्टि की कि यह दुर्लभ प्रजाति का पेंगोलिन है.जो इस इलाके में नहीं पाया जाता है.उन्होंने उस स्थल पर भी जाकर जांच पड़ताल की जहां ग्रामीणों ने पेंगोलिन को फेंक दिया था.
लेकिन पेंगोलिन वहां पर नहीं पाया गया.कुछ लोगों ने बताया कि दूर- दराज के गांव के कुछ लोग मरे हुए पैंगोलिन को उठाकर ले गए.रेंजर राजेश कुमार ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का पेंगोलिन कहां से आया.यह जांच का विषय है.इससे पूर्व भी सिकंदरा में एक पैंगोलिन मिला था. उन्होंने कहा कि ऐसी संभावना है कि इस इलाके में यह प्रजाति कहीं ना कहीं अवश्य मौजूद है.
विकास कुमार लहेरी की रिपोर्ट
जमुई टुडे न्यूज़ कि आम जनों से यही अपील है कि अगर ऐसा कोई जीव जंतु क्षेत्र में मिले,तो कृपया उन को मारे नही वन विभाग को सूचित करें, क्योंकि जीने का उनको भी हक है मनुष्य से पहले प्रकृति के ऊपर जानवरों एवं जीव जंतु का हक पहले है. प्रकृति को बचाए रखने में उनका भी योगदान है. प्रकृति के संतुलन बनाए में उनका योगदान सर्वोपरि रहता है,