पूरे देश भर में कोरोना वायरस के वजह से 17 मई तक लाॅक डाउन रहेगा ऐसे में भारत भर में बिहार के मजदूर कहीं न कहीं अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं.जो कि अपने गांव जाने के लिए लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगा रहे हैं. सरकार ने कुछ मजदूरों छात्रों एवं अन्य कामगारों को उनके घरों तक पहुंचाया है. अभी तक बिहार के लिए अन्य राज्यों से पांच ट्रेन का आगमन हुआ है जिसमें कुछ छात्र और कुछ मजदूर वापस आए हैं.
तेजस्वी यादव इस मामले में लगातार नीतीश सरकार को घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं उन्होंने आज ट्वीट करके कहा
“नशामुक्ति के हम शुरू से पक्षधर है लेकिन शराबबंदी के नाम पर नीतीश सरकार सालाना 6000 करोड़ का राजस्व घाटा सहने को तैयार है। विगत 4 वर्ष में 24000 करोड़ का घाटा हुआ है। जल जीवन हरियाली योजना का 24500 करोड़ का बजट है। )
लेकिन ग़रीब मज़दूरों को वापस लाने का किराया और संसाधन नहीं है।”
इसके अलावा उन्होंने 50 ट्रेनों का किराया देने के लिए भी सरकार से आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि
“15 साल वाली ड़बल इंजन सरकार अप्रवासी बिहारी मज़दूरों को वापस नहीं लाने के बहाने खोज टाल-मटोल कर रही है।
5 दिनों में 3 ट्रेनों से लगभग 3500 लोग ही वापस आ पा रहे है।
कभी किराया, कभी संसाधनों तो कभी नियमों का रोना रोते है।नीतीश सरकार की मंशा क़तई मज़दूरों को वापस लाने की नहीं है। आदरणीय @NitishKumar जी, ग़रीब मज़दूरों की तरफ़ से 50 ट्रेनों का किराया राजद वहन करने के लिए एकदम तैयार है क्योंकि ड़बल इंजन सरकार सक्षम नहीं है।कृपया अब अविलंब प्रबन्ध करवाइए।
@SushilModi जी- कुल जोड़ बता दिजीए, तुरंत चेक भिजवा दिया जाएगा। वैसे भी आपको खाता-बही देखने का शौक़ है। ”

तेजस्वी यादव द्वारा किया गया ट्वीट