Jamui– भ्रष्टाचार की मामलों में संबंधित विभाग के जिम्मेवार पदाधिकारी की लापरवाही से संवेदक किस तरह से लीपापोती करते हैं, इसका जीता जागता तस्वीर अगर आपको देखना है, तो आप प्लस टु उच्च विद्यालय मलयपुर आइए। यहां आपको दिन से लेकर रात की अंधेरों में भ्रष्टाचार की तस्वीर को ढकते देख पाएंगे। हालांकि ऐसा नहीं है कि , इसकी जानकारी विभाग के जिम्मेवार पदाधिकारीयों को नहीं है। इसके बावजूद भी वे अपने आंखें पर पट्टी डाले हुए हैं।
मामला अवैध निकासी से जुड़ा हुआ है। यहां वित्तीय वर्ष 23 और 24 समाप्ति के नाम पर काम किये बगैर मां कात्यायनी इंटरप्राइजेज एंड इंफ्राकोन प्राईवेट लिमिटेड द्वारा प्लस टु उच्च विद्यालय मलयपुर में असैनिक कार्य के नाम पर 4 लाख 99 हजार 500 रुपए का निकासी कर ली गई थी। मामला उजागर होने के बाद भी जिम्मेवार पदाधिकारी दोषी संवेदक और कर्मियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें काम करने की छूट दे दी है। जिस कारण संवेदक दिन -रात जी तोड़कर भवन मरोम्मति कार्य करने में लगे हुए हैं।
जबकी जानकर बताते हैं की नियम अनुसार मामले की जांच पड़ताल किया जाना चाहिए था तथा जांच में जो भी दोषी पाए जाते उन पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज करा कर निकासी की गई राशि को रिकवर किया जाना चाहिए था। लेकिन यहां तो संवेदक पर पदाधिकारी ही मेहरबान है।
इस मामले में डीईओ से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ बता रहा था। जांच में बड़े पदाधिकारी पर भी लटक सकती है। तलवार-मामले को अगर निष्पक्ष तरीका से जांच किया जाय तो इस भ्रष्टाचार की खेल में दोषियों का नाम उजागर हो सकता है। क्यों की राशि निकासी मामले में संवेदक से लेकर विभाग के कई पदाधिकारी का नाम सामने आ रहा है। जिनके बदौलत मां कात्यायनी इंटरप्राइजेज एंड इंफ्राकोन लिमिटेड शास्त्री नगर पटना के खाते में फ़र्जी सीमेंट,बालू, चिप्स,मजदूरी पेंट व ईंट के नाम के वाउचर बना कर 4 लाख 99 हजार 500 रुपए का निकासी कर ली गई।
जानिए कैसे होता है भेंडर का बिल पास ?
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोई भी सरकारी कार्य धरातल पर पूर्ण होने के बाद संबंधित विभाग के जेई कार्य स्थल से किए गए कार्य का मेजरमेंट उठाते हैं। फिर प्राक्कलित राशि के अनुसार किए गए कार्यों का मेजरमेंट बुक करते हैं, जिसे एई द्वारा पास कर बिल को विभाग भेज बिल स्वीकृत कराया जाता है, तब संबंधित अधिकारी बिल पास कर दिए गए मेजरमेंट के हिसाब से पैसे का भुगतान करते हैं। अब आश्चर्य इस बात का है जब धरातल पर कार्य ही नहीं हुआ तो इतनी प्रक्रिया करा कैसे बिल पास हो गया और पैसे का भुगतान कर दिया गया। जो जांच का विषय है।
विद्यालय में कार्य शुरू होने पर उच्च विद्यालय मलयपुर के प्रभारी सलीम अंसारी कहते हैं कि विभाग के एई द्वारा कहा गया कि काम होने दीजिए। उन्होंने कार्य संबंधित किसी प्रकार के कागजात विद्यालय में होने से इंकार किया।
कहते हैं जिलाधिकारी
इस संबंध में जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा से जब फोन पर बात की गई उन्होंने बताया कि, मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बरहट से शशिलाल की रिपोर्ट