तस्वीर: AI जनरेटेड
जमुई। जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र के करमा गांव से अंधविश्वास का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां सांप के काटने के बाद 10 वर्षीय मासूम को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय घंटों तक झाड़फूंक कराई गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, करमा गांव निवासी कारु मांझी का 10 वर्षीय पुत्र गुरुवार की शाम घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान उसे सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिजनों ने बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के ओझा-गुणी को बुला लिया। कई घंटों तक नीम के पत्तों के साथ मंत्रोच्चार और झाड़फूंक का सिलसिला चलता रहा। वायरल वीडियो में ओझा बच्चे पर नीम की पत्तियों से झाड़फूंक करते हुए दिखाई दे रहा है, जबकि आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण तमाशबीन बने खड़े हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस सांप ने बच्चे को काटा था वह विषैला नहीं था, इसलिए उसकी जान बच गई। लोगों का मानना है कि यदि सांप जहरीला होता तो इलाज में हुई देरी के कारण बड़ा हादसा हो सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप काटने के मामलों में झाड़फूंक, टोना-टोटका या घरेलू उपचार पर भरोसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक चिकित्सकीय उपचार कराना ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका है।
महिला कॉलेज, जमुई के भूगोल विभाग के प्राध्यापक एवं पर्यावरणविद प्रो. अजय कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई परिवार पहले झाड़फूंक का सहारा लेते हैं, जिससे उपचार में देरी होती है और मरीज की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सांप विषैला नहीं था, इसलिए बच्चे की जान बच गई। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप काटने की किसी भी घटना में अंधविश्वास से बचें और तुरंत अस्पताल जाकर चिकित्सकीय उपचार कराएं।
कुमार नेहरू की रिपोर्ट




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