जमुई: नगर परिषद क्षेत्र के बिहारी वार्ड संख्या-6 की रहने वाली अनीशा दुबे संघर्ष, जुनून और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर उभर रही हैं। बचपन में ही पिता शशिकांत दुबे के निधन के बाद कठिन परिस्थितियों में पली-बढ़ी अनीशा ने चुनौतियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। आज वह एक ओर प्रशिक्षित पर्वतारोही के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी कलाकृतियों से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
अनीशा ने इससे पहले हिमाचल प्रदेश स्थित पतालसु पर्वत की करीब 14 हजार फीट ऊंची चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया था। उसके बाद अनीसा ने माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर पहुंचकर जिले का नाम रोशन कर चुकी है। इसके साथ ही अनीशा ने कई पर्वतों पर पर्वतारोहण किया है।

अब अनीशा पेंटिंग की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। बचपन से ही उन्हें चित्रकला का शौक था। उन्होंने कभी किसी संस्थान से पेंटिंग की ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि यूट्यूब के माध्यम से सीखते हुए मंडला आर्ट और मधुबनी पेंटिंग में महारत हासिल की। आज वह अपनी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर आकर्षक और बेहद खूबसूरत मंडला आर्ट तथा मधुबनी पेंटिंग तैयार कर रही हैं, जिसकी लोग सराहना कर रहे हैं।

अनीशा की सफलता के पीछे उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान है। पति के निधन के बाद उन्होंने कठिन मेहनत कर बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया। वहीं अनीशा का कहना है कि परिवार के अन्य सदस्यों से उन्हें न तो कोई सहयोग मिला और न ही किसी प्रकार की आर्थिक मदद। इसके बावजूद उन्होंने अपने जुनून और आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
संघर्षों के बीच अपनी प्रतिभा को निखार रही अनीशा दुबे आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
कुमार नेहरू की रिपोर्ट




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