जमुई। बरहट प्रखंड के खादीग्राम स्थित राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय की बदहाल स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की हकीकत बयां कर रही है। दशकों पुराने भवन में संचालित इस अस्पताल में मरीजों को इलाज के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। बरसात में छत से पानी टपकता है, बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं है और पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी फिलहाल एक महिला चिकित्सक के कंधों पर है।
1976 से पहले से संचालित यह आयुर्वेदिक औषधालय आज भी पुराने भवन में चल रहा है। बरसात के दिनों में अस्पताल की छत से पानी टपकने लगता है। कमरों में गिरता पानी जहां मरीजों और चिकित्सक की परेशानी बढ़ाता है, वहीं दवाइयों और उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।

अस्पताल में वर्तमान में केवल चिकित्सक डॉ. निधि कुमारी तैनात हैं। फार्मासिस्ट, कंपाउंडर, सफाईकर्मी समेत अन्य आवश्यक कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में मरीजों का उपचार करने के साथ-साथ अस्पताल की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उन्हें ही संभालनी पड़ती है।
डॉ. निधि कुमारी ने बताया कि मरीजों का इलाज करने के साथ पूरे अस्पताल की व्यवस्था अकेले संभालना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद प्रतिदिन करीब 10 से 15 मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले पुरुष मरीजों में कई लोग नशे की हालत में भी पहुंचते हैं, जिससे उनसे बातचीत कर उपचार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
अस्पताल में गठिया, साइटिका, कमर और जोड़ों के दर्द, पाइल्स समेत कई बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। महिला मरीजों की संख्या भी काफी है, जो मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं समेत अन्य बीमारियों का आयुर्वेदिक उपचार कराती हैं।
डॉ. निधि के अनुसार, जब उनकी यहां पोस्टिंग हुई थी, तब बैठने के लिए कुर्सी और टेबल तक की समुचित व्यवस्था नहीं थी। बरसात के दौरान छत से पानी टपकना आम बात थी। बाद में सरकारी स्तर पर फंड मिलने के बाद धीरे-धीरे कुछ व्यवस्थाओं में सुधार हुआ और आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं।

हालांकि, अस्पताल की कई बुनियादी समस्याएं अब भी बरकरार हैं। बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बिजली गुल होते ही अस्पताल में अंधेरा छा जाता है। कई बार एलईडी बल्ब की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ता है।
महिला और मरीजों की सुविधा के लिए भेजे गए कई उपकरण भवन और पर्याप्त जगह के अभाव में एक कमरे में बंद पड़े हैं। वहीं, मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
इन तमाम समस्याओं के बावजूद आसपास के ग्रामीण इस आयुर्वेदिक औषधालय पर भरोसा कर प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की संख्या और अस्पताल की जरूरतों को देखते हुए खादीग्राम राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय को बेहतर भवन, पर्याप्त स्टाफ और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुमार नेहरू की रिपोर्ट




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