जमुई। सावन माह की अंतिम सोमवारी पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए क्यूल नदी में स्नान करने पहुंचा एक परिवार उस वक्त मातम में डूब गया, जब नदी में बालू खनन के बाद बने कथित गहरे गड्ढे में 13 वर्षीय रिया कुमारी डूब गई। बेटी को बचाने के लिए मां गीता देवी और 10 वर्षीय भाई सिद्धार्थ भी नदी में उतर गए, लेकिन वे भी गहरे पानी में फंस गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने मां-बेटे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि रिया की जान नहीं बचाई जा सकी।
करीब ढाई से तीन घंटे की मशक्कत के बाद स्थानीय गोताखोरों की मदद से रिया का शव नदी से बरामद किया गया। घटना टाउन थाना क्षेत्र के सोनपे गांव निवासी सुधीर सिंह के परिवार की है।

बताया जाता है कि सोमवार को सुधीर सिंह की पत्नी गीता देवी अपने दोनों बच्चों रिया और सिद्धार्थ के साथ सोमवारी व्रत को लेकर शहर से सटे स्मारक घाट पर स्नान करने पहुंची थीं। इसी दौरान रिया अचानक गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी। बेटी को बचाने के प्रयास में मां और छोटा भाई भी नदी में उतर गए। ग्रामीणों ने किसी तरह दोनों को बचा लिया, लेकिन रिया को नहीं बचाया जा सका।
खनन के बाद बने गहरे गड्ढों पर उठे सवाल
घटना के बाद क्यूल नदी में बालू खनन की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि स्मारक घाट के पास बालू खनन के दौरान निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए पोकलेन मशीन से नदी के अंदर काफी गहराई तक खुदाई की गई।
ग्रामीणों के अनुसार, नदी में कई स्थानों पर 15 फीट से लेकर 20 और करीब 30 फीट तक गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बरसात के बाद ये गड्ढे पानी से भर गए हैं और नदी में स्नान करने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि बालू खनन के बाद बने इन गड्ढों को समतल कराने की जिम्मेदारी किसकी थी। लोगों ने खनन विभाग और संबंधित संवेदक की भूमिका की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
पिता बोले— आज मेरी बेटी गई, कल किसी और की बारी न हो
मृतका के पिता सुधीर सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी दोनों बच्चों के साथ नदी में स्नान करने गई थीं। रिया के गहरे पानी में चले जाने के बाद पत्नी और बेटे ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बेटी की जान नहीं बच सकी।
उन्होंने प्रशासन से नदी में बने गहरे गड्ढों को तत्काल समतल कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की। भावुक पिता ने कहा कि आज उनकी बेटी की जान गई है, लेकिन अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कल किसी दूसरे परिवार का घर भी उजड़ सकता है।
मां गीता देवी ने बताया कि रिया भी सोमवारी व्रत रखी थी। स्नान के दौरान वह अचानक गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के प्रयास में वह और उनका बेटा भी डूबने लगे, जिन्हें आसपास मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह बाहर निकाल लिया।
अधिकारी पहुंचे, मुआवजे और कार्रवाई का भरोसा
घटना की सूचना मिलते ही टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सदर प्रखंड के अंचलाधिकारी सौरभ कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने घटना और नदी में बने गहरे गड्ढों के मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
अंचलाधिकारी ने मृतका के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की बात भी कही।
वहीं, हादसे के बाद मौके पर पहुंची मेडिकल टीम को लेकर भी परिजनों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि चिकित्सक के बजाय एमटी को मौके पर भेजा गया, जिससे सामान्य स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक सहायता को लेकर भी परेशानी हुई।
13 वर्षीय रिया की मौत ने क्यूल नदी में बालू खनन के बाद बने गहरे गड्ढों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन मामले की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।




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