जमुई। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जमुई में बदलाव और विश्वास की एक भावुक तस्वीर देखने को मिली। कभी नक्सली गतिविधियों के साये में रहने वाले जिले के सुदूरवर्ती गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड क्षेत्रों से मुख्यधारा में लौटे परिवारों की महिलाएं शुक्रवार को स्वतः जिला मुख्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर प्रशासन के प्रति अपना अटूट विश्वास और आत्मीयता जताई।
महिलाओं के इस आत्मीय पहल को जिला प्रशासन ने पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे सामाजिक बदलाव और विश्वास बहाली का महत्वपूर्ण संकेत बताया।

DM बोले- भावनात्मक जुड़ाव हमारी कोशिशों की सफलता
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सुदूरवर्ती और पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं का स्वयं समाहरणालय पहुंचकर प्रशासन के प्रति विश्वास प्रकट करना अच्छी नीयत और निरंतर प्रयासों की सफलता का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि यह प्रशासन के लिए भी बेहद भावुक क्षण है। प्रशासन की निरंतर कोशिश रहेगी कि इन क्षेत्रों की जनता और प्रशासन के बीच बना भावनात्मक जुड़ाव हमेशा अटूट रहे।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियों के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान से ही लगातार सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। क्षेत्र में जिन मूलभूत नागरिक सुविधाओं की कमी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का यह स्नेह और विश्वास केंद्र व राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों तथा जनता और प्रशासन के बीच मजबूत होती विश्वास बहाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
महिलाओं ने साझा किया बदलाव का अनुभव
गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड से पहुंची महिलाओं ने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों के नक्सली गतिविधियों से बाहर निकलकर मुख्यधारा में लौटने के बाद उनके जीवन में अभूतपूर्व और सकारात्मक बदलाव आया है।
महिलाओं ने बताया कि एक समय ऐसा था जब नक्सली गतिविधियों के भय के कारण ग्रामीण पुलिस को देखते ही डरकर छिप जाया करते थे, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब ग्रामीण जिला प्रशासन के कार्यक्रमों में शामिल होकर अपनी खुशी और भागीदारी दर्ज कराते हैं।
भावुक होकर महिलाओं ने कहा कि जिस प्रकार एक भाई अपने परिवार और बहनों की रक्षा का दायित्व निभाता है, उसी प्रकार जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक उनके दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ निरंतर विकास सुनिश्चित करने का काम कर रहे हैं।
स्कूल, स्वास्थ्य, राशन और पानी जैसी सुविधाओं से बदली जिंदगी
महिलाओं ने बताया कि अब उनके बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं। गांवों में आशा कार्यकर्ताओं का चयन हो चुका है और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। एंबुलेंस और चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
इसके अलावा घर-घर राशन वितरण और नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति भी सुचारू रूप से संचालित हो रही है। महिलाओं ने कहा कि इन सुविधाओं के पहुंचने से सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के पहुंचीं महिलाएं
गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड जैसे पूर्व अति-नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों की महिलाओं का बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के स्वतः जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को रक्षा-सूत्र बांधना केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा रही है।
वर्षों तक नक्सलवाद के साये में विकास की मुख्यधारा से कटे इन इलाकों में आया यह बदलाव सरकार की संवेदनशीलता, विकासपरक नीतियों और जिला प्रशासन के जमीनी प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को बांधा गया रक्षा-सूत्र अब केवल एक पर्व की रस्म नहीं, बल्कि भय के माहौल से निकलकर विश्वास, सुरक्षा और विकास की राह पर आगे बढ़ते नए जमुई की एक सशक्त तस्वीर बनकर सामने आया है।




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