जमुई: लक्ष्मीपुर प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय आनंदपुर को लेकर शिक्षा विभाग के विरोधाभासी आदेशों से नाराज दर्जनों छात्र-छात्राएं गुरुवार को जिला समाहरणालय पहुंच गए। हाथों में आवेदन लेकर पहुंचे बच्चों ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पढ़ाई बचाने की गुहार लगाई। छात्रों का कहना था कि कभी उन्हें बसमता में पढ़ने का निर्देश दिया जाता है, तो कभी आनंदपुर भेज दिया जाता है। इस असमंजस के कारण पिछले कई दिनों से उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित है।
मामला तब शुरू हुआ जब जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 27 जुलाई को जारी आदेश में विद्यालय का संचालन आनंदपुर में कराने की अनुमति दी। इसके बाद छात्र वहां पहुंचने लगे, लेकिन उनका आरोप है कि शिक्षक नियमित रूप से नहीं आए और पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। इसी बीच 3 अगस्त को शिक्षा विभाग ने नया आदेश जारी कर पहले के निर्देश को स्थगित करते हुए विद्यालय का संचालन फिर से बसमता में करने का फैसला लिया। विभाग ने इसका कारण विद्यालय की जमीन पर चल रहे टाइटल सूट और जांच समिति के गठन को बताया।

समाहरणालय पहुंचे छात्रों ने कहा कि छह महीने बाद परीक्षा है, लेकिन उनकी पढ़ाई ठप है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल कागजों पर आदेश जारी कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही। बच्चों का यह भी कहना था कि आनंदपुर विद्यालय की वास्तविक स्थिति देखने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।

पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर विभाग पहले भवन निर्माण को पर्याप्त बताते हुए पढ़ाई शुरू करने का आदेश देता है, वहीं कुछ दिनों बाद उसी भवन को भूमि विवाद का हवाला देकर अनुपयुक्त घोषित कर देता है। इससे न केवल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, बल्कि ग्रामीणों में भी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी है।




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