आरोप: सौतेली मां करती थी मारपीट, कमरे में बंद कर मुंह में कपड़ा ठूंसने और गर्म छड़ से दागने का भी दावा; शरीर पर 100 से अधिक चोट के निशान होने की बात
जमुई। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में 10 साल की आन्वी वर्मा कथित तौर पर अपने ही घर में डर के साये में जी रही थी। बच्ची ने अपने साथ मारपीट और प्रताड़ना किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कई बार उसे कमरे में बंद कर दिया जाता था और मुंह में कपड़ा ठूंसकर पिटाई की जाती थी।
आन्वी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसे बेलन से मारा जाता था, पेट में चुट्टी काटी जाती थी और कैंची से हमला किए जाने के अलावा सिर को दीवार से घसीटने जैसी घटनाएं भी होती थीं। बच्ची का आरोप है कि उसके साथ होने वाली मारपीट के कारण वह लगातार डरी रहती थी। उसने कहा, “अब मैं घर नहीं जाना चाहती। मुझे डर लगता है। मुझे बचा लीजिए और मुझे पढ़ने दीजिए।”
चाचा के साथ बाल संरक्षण इकाई पहुंची बच्ची
लगातार कथित मारपीट और प्रताड़ना से परेशान आन्वी आखिरकार घर से निकलकर अपने चाचा आनंद वर्मा के पास पहुंची। चाचा उसे लेकर बाल संरक्षण इकाई पहुंचे, जहां बच्ची ने अधिकारियों के सामने अपने साथ होने वाली घटनाओं की जानकारी दी और संरक्षण की गुहार लगाई।
चाचा आनंद वर्मा का कहना है कि आन्वी पहले स्कूल जाती थी, लेकिन अब उसकी पढ़ाई पूरी तरह बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची को कई बार कमरे में अकेले बंद कर मुंह में कपड़ा ठूंसकर पीटा जाता था। उसके शरीर पर मारपीट के कई निशान हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब बच्ची के साथ होने वाली मारपीट की शिकायत उसके पिता से की गई तो कथित तौर पर जवाब मिला कि “मेरी बेटी है, मैं जो करूं।”
नाना ने बाल संरक्षण समिति में दिया आवेदन
आन्वी की मां करीब आठ साल पहले पारिवारिक कारणों से घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद उसके पिता रवि कुमार वर्मा ने दूसरी शादी कर ली। बच्ची के नाना कमलेश प्रसाद वर्मा ने बाल संरक्षण समिति को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि दूसरी शादी के कुछ समय बाद से ही आन्वी की सौतेली मां सरोजिनी कुमारी उसे प्रताड़ित करने लगी।
नाना का दावा है कि बच्ची के शरीर पर कई जगह चोट और पुराने जख्म के निशान हैं। शरीर के कई हिस्सों पर छड़ से दागे जाने के निशान होने की बात भी आवेदन में कही गई है।
बच्ची के शरीर पर 100 से अधिक चोट के निशान होने की बात
बाल संरक्षण इकाई पहुंचने के बाद बच्ची की स्थिति को गंभीरता से लिया गया। परिजनों की ओर से लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने के आरोपों के बीच उसके शरीर पर 100 से अधिक चोट के निशान होने की बात सामने आई है। हालांकि, चोटों और कथित घटनाओं से जुड़े सभी आरोपों की आधिकारिक जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।

काजल मोदी, सहायक निदेशक, बाल कल्याण समिति
प्रशासन के संरक्षण में आन्वी, प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू
बाल कल्याण समिति की सहायक निदेशक काजल मोदी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जांच में बच्ची के साथ परिजनों द्वारा प्रताड़ना किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल आन्वी प्रशासन के संरक्षण में सुरक्षित है। दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में प्राथमिकी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
अब आन्वी को चाहिए सुरक्षित बचपन और शिक्षा
आन्वी फिलहाल सुरक्षित संरक्षण में है, लेकिन उसकी कहानी सिर्फ घरेलू प्रताड़ना के आरोपों तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी सामने लाती है कि एक 10 साल की बच्ची की पढ़ाई और सुरक्षित बचपन कैसे छिन गया। अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ कथित दोषियों पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि आन्वी को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और उसका सामान्य बचपन वापस दिलाने की भी है।




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