जमुई: जिले में अवैध अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद कथित रूप से बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों में मरीजों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किए जाने की आशंका बनी हुई है। ऐसा ही एक मामला जमुई जिले के गिद्धौर से सामने आया है, जहां स्टेशन रोड स्थित गिद्धौर इमरजेंसी हॉस्पिटल के संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल के दौरान अस्पताल के रजिस्ट्रेशन, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

सड़क पर अस्पताल का बोर्ड, भवन पर नहीं कोई पहचान
गिद्धौर स्टेशन रोड पर संचालित इस अस्पताल के सामने सड़क किनारे एक बोर्ड लगाया गया है, जिस पर गिद्धौर इमरजेंसी हॉस्पिटल का नाम और कई डॉक्टरों के नाम अंकित हैं। हालांकि, अस्पताल के भवन पर अस्पताल से संबंधित कोई बोर्ड या स्पष्ट पहचान नहीं दिखाई दी।
पड़ताल के दौरान अस्पताल के अंदर दो से तीन मरीज बेड पर भर्ती मिले। लेकिन मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। अस्पताल में मौजूद एक युवक, जिसने खुद को कंपाउंडर बताया, वह यह स्पष्ट नहीं कर सका कि अस्पताल का संचालन किस डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है।

सुबह 4 बजे गए डॉक्टर, दोपहर तक नहीं लौटे!
अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत के दौरान जानकारी मिली कि डॉक्टर सुबह करीब 4 बजे अस्पताल से चले गए थे और दोपहर 12 बजे तक वापस नहीं लौटे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों की देखरेख और इलाज की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा था?
जब अस्पताल के रजिस्ट्रेशन को लेकर जानकारी जुटाई गई तो बताया गया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। जबकि स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, यह अस्पताल एक साल से अधिक समय से संचालित हो रहा है।

आखिर कौन चला रहा है अस्पताल?
बिना रजिस्ट्रेशन के कथित रूप से संचालित हो रहे इस अस्पताल को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं।
- क्या अस्पताल में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं?
- डॉक्टरों की अनुपस्थिति में मरीजों की देखरेख कौन कर रहा है?
- एक साल से अधिक समय से संचालित अस्पताल का अब तक रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं हुआ?
इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
ACMO ने कहा- बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने वालों पर होगी कार्रवाई
जिले में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों को लेकर पूछे जाने पर एसीएमओ (ACMO) अरविंद कुमार ने बताया कि किसी भी डॉक्टर द्वारा अस्पताल संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। अस्पताल में कौन-कौन डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इसकी जानकारी भी विभाग को उपलब्ध करानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में कार्यरत एएनएम और जीएनएम का प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है। यदि कोई अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किया जा रहा है, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
गिद्धौर इमरजेंसी हॉस्पिटल के संचालन को लेकर सामने आए इन तथ्यों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में जांच कर अस्पताल के रजिस्ट्रेशन, डॉक्टरों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने पर कार्रवाई का प्रावधान है, तो आखिर गिद्धौर में कथित रूप से एक साल से अधिक समय से संचालित इस अस्पताल पर अब तक विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?




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