जमुई के चर्चित दरोगा प्रभात रंजन हत्याकांड मामले में बुधवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अवैध बालू कारोबार से जुड़े तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुधीर सिन्हा की अदालत ने कृष्ण दास, मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को दोषी करार देते हुए उम्रकैद के साथ 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं मामले में नामजद अन्य आरोपित भुलिया उर्फ झुलिया, चिंता देवी और दशरथ दास को सरकारी कार्य में बाधा डालने का दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत दो-दो वर्ष की सजा सुनाई गई।

एपीपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि लगभग ढाई साल तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि मुख्य तीन अभियुक्तों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी गई है, जबकि अन्य तीन आरोपितों को सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में दोषी पाया गया।

दरअसल, 14 नवंबर 2023 को गरही थाना में पदस्थापित दरोगा प्रभात रंजन अवैध बालू खनन और तस्करी के खिलाफ पुलिस टीम के साथ कार्रवाई करने पहुंचे थे। इसी दौरान बालू लदे ट्रैक्टर से कुचलकर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे बिहार पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया था और अवैध बालू कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच टीम गठित कर मामले की गहन जांच की थी। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को अवैध बालू माफियाओं के खिलाफ कानून का सख्त संदेश माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की बड़ी जीत बताया है।
कुमार नेहरू की रिपोर्ट




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